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बुधवार, 12 अक्तूबर 2022

पूर्णिया पुलिस अधीक्षक पर कार्रवाई जातीय दुर्भावना का परिणाम : अजय भारती । Seemanchal News Live


 पूर्णिया । पुलिस अधीक्षक श्री दयाशंकर के आवास एवं अन्य जगहों पर स्पेशल निगरानी विभाग की टीम के द्वारा छापेमारी को लेकर बहुजन क्रांति मोर्चा के जिला संयोजक सह बहुजन मुक्ति पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय भारती ने रोष व्यक्त किया है। अजय भारती ने कहा दलित विरोधी महागठबंधन की सरकार ने दलित समाज से आने वाले पूर्णिया पुलिस अधीक्षक दयाशंकर की छवि को बदनाम करने की सोची समझी साजिश नाकाम हुआ हैं। इसे साफ जाहिर होता है कि महागठबंधन सरकार की कितना दलित विरोधी हैं। इस कार्रवाई से यह भी सिद्ध होता दलित समाज के लोग पढ़ लिख कर कितनों बड़े से बड़े पद पर चले जाए। लेकिन जाति पीछा नहीं छोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कई उच्च जाति के पुलिस कप्तान आए वो किया दूध का धुले हुए था । सिर्फ उन सभी पर उच्च जाति होने का मोहर लगा हुआ था। अगर महागठबंधन की सरकार दलित विरोधी नहीं है तो बिहार के उच्च जाति के किसी एक एसपी और डीएम पर स्पेशल निगरानी के टीम के द्वारा छापेमारी कराकर देख ले इन से सब पता चल जाएगा कि उच्च जाति एसपी और डीएम कितना भर्ष्टाचार में डूबे हुए है। उन्होंने कहा कि साफ छवि के पुलिस कप्तान श्री दयाशंकर के महागठबंधन की सरकार को टैक्स के रूप में रूपया नहीं पहुंचाने के कारण बदनाम करने की साजिश के तहत इनके सरकारी आवास सहित अन्य जगहों पर स्पेशल निगरानी के टीम से छापेमारी करवाया हैं। छापेमारी में किया मिला ये तो सब को पता हैं। उन्होंने कहा कि सबको पता हैं कि उन्होंने कहा कि सब को पता है कि एसपी दयाशंकर दलित समाज से आते है। बिहार में नीतीश कुमार का कोई घोर विरोधी हैं तो दलित समाज से आने वाले लोजपा ( राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान हैं। मुख्यमंत्री नीतीश के द्वारा चिराग पासवान के कद को नीचे नहीं कर पाया तो दलित समाज के लोगों पर ही टारगेट करने लगा और दलित समाज से आने वाले पुलिस अधीक्षक दयाशंकर को बदनाम करने को लेकर टारगेट कर छापेमारी करवा दिया। इससे दो दिन पूर्व भी दिल्ली में राजद के एक कार्यक्रम में दलित समाज से आने वाले श्याम रजक को महागठबंधन की सरकार में मंत्री तेजप्रताप यादव के द्वारा गलत आरोप लगाकर बदनाम करने की कोशिश किया गया था। क्योंकि की श्याम रजक को कार्यक्रम के दौरान तेजप्रताप से पहले बैठने के लिए कुर्सी मिला था जिसके कारण तेज प्रताप को सही नहीं लगा कि दलित समाज के लोग हमसे आगे बैठे।

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